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जल्द लगने वाला है साल का पहला चंद्रहण: जाने इसकी तिथि, समय और सूतक काल के बारे में

साल का पहला चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण के ठीक 15 दिन बाद लग रहा है. ऐसे में इसका क्या प्रभाव भारत में पड़ेगा इस लेख में जानिए….

नईदिल्ली (ए)। पूर्णिमा के दिन 12 दिन बाद यानी 16 मई साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूतक काल वहां मान्य होता है, जहां ग्रहण दिखाई देता है। 16 मई को यह प्रातः काल 07 बजकर 02 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। 16 मई 2022 को खग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में नहीं दिखाई देगा।  यह ग्रहण कनाडा, न्यूजीलैंड के कुछ भागों में, जर्मनी में दिखेगा।इसके बाद साल का आखिरी चंद्र ग्रहण नंवबर में लगेगा।

आपको बता दें कि इस सल कुल चार ग्रहण लग रहे हैं, दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण।16 मई के बाद अब 25 अक्टूबर 2022 को स्वाति नक्षत्र और तुला राशि पर सूर्य ग्रहण शाम 4:23 बजे शुरू होगा। यह ग्रहण शाम 6:25 बजे समाप्त होगा। इस ग्रहण के देश के विभिन्न स्थानों में दिखाई देने से प्रभाव पड़ेगा। 8 नवंबर 2022 को खण्डग्रास चंद्र ग्रहण भरणी नक्षत्र और मेष राशि पर होगा। यह भी भारत में दिखाई देगा। दो ग्रहण दिखाई देंगे और दो ग्रहण नहीं दिखाई देंगे।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल 2022 में पहला चंद्रग्रहण 16 मई को लगेगा. यह भारत के साथ-साथ अन्य कई देशों में देखा जा सकेगा. चंद्रग्रहण का समय प्रात: काल 7:02 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 12:20 बजे पर समाप्त होगा।

चंद्र ग्रहण 2022 सूतक काल- साल का पहला चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा तथा यह पूर्ण चंद्रग्रहण भी है. इस लिए इसका सूतक काल मान्य होगा. चंद्रग्रहण में सूतक काल 9 घंटे का होता है. यह चंद्रग्रहण लगने के 9 घंटे पहले शुरू होता है और चंद्रग्रहण के ख़त्म होने के साथ ही खत्म होता है. चन्द्र  ग्रहण के दौरान सूतक संबंधी सभी सावधानियां बरतनी होंगी।

कब लगेगा दूसरा चंद्र ग्रहण- इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को लगेगा. यह भी भारत समते कई देशों में देखा जा सकेगा. पूर्ण चंद्रग्रहण होने के कारण इसमें भी सूतक मान्य होगा. चंद्र ग्रहण का समय दोपहर 1:32 मिनट पर शुरू होकर शाम में 7:27 मिनट पर समाप्त होगा।

कहां दिखाई देगा ग्रहण- साल का पहला चंद्र ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिकी के अधिकांश हिस्सों में, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका आदि देशों में पूर्ण ग्रहण का प्रभाव होगा. भारत में इसका प्रभाव बिल्कुल नहीं पड़ रहा है, ऐसे में यहां इसका सूतक मान्य नहीं होगा।

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