रायपुर। छत्तीसगढ़ में डेढ़ साल बाद विधानसभा चुनाव होना है, लेकिन खैरागढ़ उप चुनाव में कांग्रेस से मिली हार ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी की दशा और दिशा सुधारने हाईकमान ने प्रदेश संगठन के बड़े नेताओं को दिल्ली तलब किया है। विधानसभा के बाद नगरीय निकाय और उप चुनावों में भाजपा की हार का असर चुनावी कमान संभाल रहे दिग्गज नेताओं पर पड़ता दिख रहा है।
चुनाव को देखते हुए पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और महामंत्री (संगठन) पवन साय को दिल्ली बुलाया है। सभी नेता एक-दो दिनों में दिल्ली जाएंगे। बताया जा रहा है कि इन नेताओं की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महामंत्री (संगठन) शिवप्रकाश के साथ बैठक हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी लगातार छत्तीसगढ़ का दौरा कर गई हैं। उन्होंने रायपुर से लेकर बस्तर तक की रिपोर्ट संगठन को सौंपी है, जिसमें संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत पर बल दिया गया है।
संगठन की गतिविधियां नहीं के बराबर- सूत्रों के मुताबिक, बस्तर, सरगुजा व दुर्ग संभाग के दौरे के बाद यह पाया गया कि ज्यादातर जिलों में कामकाज संतोषजनक नहीं है। संगठन की गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। इस पर राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) शिवप्रकाश ने चिंता जताई थी। इन सबके चलते पार्टी हाईकमान बैठक बुलाने को मजबूर हो गया है। चर्चा है कि बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर रोड मैप तैयार किया जा सकता है। संगठन में आमूलचूल परिवर्तन पर भी मंत्रणा की सकती है। यही नहीं, कुछ बड़े नेताओं के कार्यक्रम भी तय किए जा सकते हैं। विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग पर फोकस किया जाएगा।
प्रदेश संगठन में गुटबाजी पड़ रही भारी- सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गुटबाजी की वजह से संगठन में एकता नहीं है। कई गुटों में नेता बंटे हुए हैं। कोई भी बडे़ आयोजनों में नेताओं का नहीं आना भी सुर्खियों में रहता है। राजधानी रायपुर से लेकर दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर व सरगुजा तक कई गुटों में नेता बंटे हुए हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी व सीएम भूपेश बघेल भी समय-समय पर इस पर तंज कसते रहे हैं। सीएम भूपेश बघेल तो कई बार यहां तक कह चुके हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को प्रदेश संगठन पर भरोसा नहीं है। राष्ट्रीय नेतृत्व यहां के भाजपा नेताओं से किनारा करने लगे हैं। प्रदेश प्रभारी भी स्थानीय नेताओं को तवज्जों नहीं देती।















