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बिहार दिवस: 110 साल के सफर में बिहार ने देश-दुनिया को दिखायी राह, इन बातों को जान कर आप करेंगे गर्व

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए विद्रोह में बिहार अगुआ रहा. देश की आजादी के लिए 1947 तक जितने भी आंदोलन हुए, बिहार के लोगों ने उसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. सैकड़ों लोग जेल गये, हजारों अंग्रेजों की प्रताड़ना के शिकार हुए….

पटना (ए)। बिहार 110 साल का हो गया है. 22 मार्च, 1912 को बंगाल प्रोविंस से अलग होकर बिहार एक राज्य बना था. उस समय ओड़िशा भी बिहार का ही हिस्सा था. 1936 में बिहार और ओड़िशा को दो अलग-अलग राज्यों के रूप में दर्जा मिला. इन 110 वर्षों के सफर में चाहे राजनीति का क्षेत्र हो या समाज सुधार आंदोलन, कई ऐसे टर्निंग प्वाइंट आये, जिसने बिहार को देश-दुनिया में एक नये रूप में जगह दिलायी. वर्ष 2000 में एक बार फिर बिहार का भूगोल बदल गया, जब झारखंड एक नया प्रदेश बना।

आजादी की लड़ाई

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए विद्रोह में बिहार अगुआ रहा. देश की आजादी के लिए 1947 तक जितने भी आंदोलन हुए, बिहार के लोगों ने उसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. सैकड़ों लोग जेल गये, हजारों अंग्रेजों की प्रताड़ना के शिकार हुए।

1917 में गांधी जी का आना

महात्मा गांधी का चंपारण आना और यहां के निलहे किसानों की समस्या को उठाना इतिहास की एक युगांतरकारी घटना बन गयी. चंपारण की घटना ने गांधी जी को महात्मा बना दिया और पूरे देश की निगाहें उनकी ओर टिक गयीं।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन

महात्मा गांधी ने 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था. बिहार में भी आंदोलन की आग फैली सचिवालय पर तिरंगा फहराने के लिए निकले छात्रों को अंग्रेजों की गोली खानी पड़ी।

1967 में संविद सरकार

बिहार में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी. पांच मार्च, 1967 को महामाया प्रसाद सिन्हा इस सरकार में मुख्यमंत्री बने. इसे संविद सरकार का नाम दिया गया।

1974 में छात्र आंदोलन

1974 में बिहार से निकली छात्र आंदोलन की हवा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश होते हुए समूचे देश में फैल गयी. 1975 में देश में इमरजेंसी लागू कर दी गयी. लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने छात्र आंदोलन को नेतृत्व दिया था।

1990 में सत्ता में हुआ बदलाव

लंबी कांग्रेसी हुकूमत के बाद 1990 के मार्च में जनता दल के मुख्यमंत्री के तौर पर लालू प्रसाद ने शपथ ली. मंडल-कमंडल का मुद्दा राजनीति के केंद्र में था. भाजपा नेता एलके आडवाणी की समस्तीपुर में गिरफ्तारी के बाद लालू प्रसाद नये मुहावरे का प्रतीक बन गये।

2000 में बिहार बंटा झारखंड बना

15 नवंबर, 2000 को बिहार का भूगोल तब बदल गया, जब दक्षिण बिहार के 18 जिलों को अलग करते हुए झारखंड अलग प्रदेश बना. ज्यादातर कल-कारखाने और खनिज भंडार का इलाका झारखंड में चला गया।

2005 में नीतीश की सरकार

राजद के 15 साल के शासन के बाद 2005 के नवंबर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नयी सरकार बनी. 2006 में इस सरकार ने सबसे प्रभावी और असरदार कानून बनाया. यह पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण से जुड़ा कानून था।

2010 में भ्रष्टाचार पर वार

2010 में जब नीतीश कुमार की अगुआई में दूसरी बार सरकार बनी तो भ्रष्ट लोगों की संपत्ति जब्त कर उसमें स्कूल खोले जाने का अहम फैसला लिया गया. अवैध तरीके से बनाये गये कई अधिकारियों के आलीशान मकानों में सरकारी स्कूल खोले गये।

2016 में पूर्ण शराबबंदी

पांच अप्रैल, 2016. देश और बिहार के लिए ऐतिहासिक दिन रहा. बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू कर दिया. पूरे देश में इस प्रकार शराबबंदी कानून प्रभावी करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना. 21 जनवरी, 2017 को विश्व की सबसे लंबी मानव शृंखला बिहार में बनी. करीब तीन करोड़ से अधिक लोगों ने 11,400 किमी लंबी मानव शृंखला बनायी।

110 साल बाद भी हार्डिंग को नहीं भूला है पटना

सच मायने में लॉर्ड हार्डिंग आधुनिक पटना के शिल्पकार थे. उनके प्रयासों से ही बांकीपुर से पश्चिम एक नूतन राजधानी पटना के रूप में अस्तित्व में आया. लॉर्ड हार्डिंग के प्रयासों से ही पटना में शैक्षणिक संस्थान के अलावा बिहार में अनेक सड़कों के निर्माण करवाया’. तमाम ऐतिहासिक इमारतें 110 साल बाद भी इसकी गवाही देते है. पटना को विकसित करने को लेकर लॉर्ड हार्डिंग कितने संवेदनशील थे, यह नूतन राजधानी क्षेत्र को देखकर आज भी महसूस किया जा सकता है।

बिहार को नयी पहचान देकर पुराना गौरव लौटाया

बंगाल से अलग बिहार-उड़ीसा प्रांत के निर्माण में लॉर्ड हार्डिंग की भूमिका सबसे अहम है. हार्डिंग ने न सिर्फ बिहार को आधुनिक भारत में एक अलग प्रांत की पहचान दी, बल्कि उस गौरव को भी लौटाया, जिसे कभी मगध साम्राज्य और लिच्छवी गणराज्य के कालखंड हमने पा रखा था. इतना ही नहीं आधुनिक बिहार के इतिहास में पटना को एक नूतन राजधानी के रूप में विकसित करने का काम भी ब्रितानिया हुकूमत के इसी नौकरशाह ने किया।

दिल्ली दरबार में की थी बिहार राज्य के निर्माण की घोषणा

1911 में जार्ज पंचम के दिल्ली दरबार में लॉर्ड हार्डिंग ही वह वो पहले शख्स थे, जिन्होंने बंगाल से अलग बिहार-उड़ीसा नाम से एक अलग प्रांत के निर्माण की घोषण की. उस वक्त इस नये प्रांत की राजधानी को लेकर आम राय नहीं बन रही थी, लेकिन लॉड हार्डिंग ने दिल्ली में मौजूद बिहार राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े नेताओं को भरोसा दिया कि नये प्रांत की राजधानी पटना ही होगी. लॉर्ड हार्डिंग के लिए पटना को बिहार-उड़ीसा की राजधानी के रूप में चुनना और विकसित करना आसान नहीं था।

आसान नहीं था पटना को राजधानी घोषित करना

गंगा, पुनपुन और सोन तीन नदियों के किनारे बसे पटना एक सस्ते बंदरगाह के रूप में जाना जाता था, लेकिन कोलकाता के मुकाबले इस शहर में राजधानी लायक आधारभूत संरचनाएं नहीं थी. पटना से बेहतर आधारभूत ढांचा कटक के पास था. इसके बावजूद लॉर्ड हार्डिंग ने पटना का चयन किया. लॉर्ड हार्डिंग ने नये प्रांत की नूतन राजधानी तैयार के लिए न्यूजीलैंड से आर्किटेक्ट जेएफ मुनिंग्स को बुलाया और दिल्ली के तर्ज पर एक टाउनशिप तैयार करने की जिम्मेदारी दी।

कम बजट के बावजूद बनायी खूबसूरत इमारतें

आज भी पटना में सड़कों पर चलते वक्त हम और आप जिन इमारतों को निहारते रहते हैं, उनमें से अधिकतर लॉर्ड हार्डिंग के कार्यकाल में ही बना हुआ है. पटना हाईकोर्ट हो या विधानसभा की इमारत, पीएमसीएच हो, पटना संग्रहालय हो या बांकीपुर गर्ल्स हाइ स्कूल इन तमाम इमारतों का निर्माण उसी कालखंड में हुआ. यूरोपीय वास्तुकला की छाप आज भी पटना के धरोहरों में साफ तौर पर देखी जाती है. यही नहीं इन सभी इमारतों को लॉर्ड हार्डिंग ने तब पूरा किया, जब पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान ब्रिटिश हुकूमत की जर्मनी ने कमर तोड़ रखी थी।

अपने कार्यकाल में ही बनाया हाइकोर्ट भवन

लॉर्ड हार्डिंग के कार्यकाल 1910 से 16 तक रहा. उनके कार्यकाल में बने पटना उच्च न्यायालय यूरोपीय वास्तुकला का सर्वोत्कृष्ट नमूना है. तत्कालीन वायसराय लार्ड हार्डिंग ने खुद 3 फरवरी, 1916 को शानदार समारोह में पैलेडियन डिजाइन से निर्मित नियोक्लासिकल शैली में बनी पटना हाई कोर्ट के विशाल इमारत का उद्घाटन किया था. चाल सेटिंग ने 1 दिसंबर, 1913 को इमारत की नींव रखी थी और 3 साल में उच्च न्यायालय बनकर तैयार हो गया था. 1936 में उड़ीसा से अलग होने के बावजूद 1948 तक पटना उच्च न्यायालय भवन सही न्यायिक कार्य चलता था।

बिहार के लोगों के मन में आज भी है सम्मान

लॉर्ड हार्डिंग ने अगर बिहार को नया स्वरूप दिया तो तत्कालीन बिहार के लोगों ने भी उनका पूरा सम्मान किया. पटना में दरभंगा महाराज की अध्यक्षता में हुई सभा में हसन इमाम के प्रस्ताव पर पटना के पहले सार्वजनिक पार्क का नाम लॉर्ड हार्डिंग के नाम पर हार्डिंग पार्क रखा गया. वहीं नूतन राजधानी इलाके के दो मुख्य मार्गों में से एक का नाम लॉर्ड हार्डिंग के नाम पर हार्डिंग रोड रखा गया. वैसे आजादी के बाद बिहार के समाजवादी नेताओं की मांग पर हार्डिंग पार्क और हार्डिंग रोड का नाम बदल दिया गया है. इसके बावजूद आज भी पटना संग्रहालय में जब लोग लॉर्ड हार्डिंग की प्रतिमा को देखते हैं तो सहसा ठहर कर निहारते हैं और बिहार के आधुनिक इतिहास के इस शिल्पकार को नमन करते हैं. लॉर्ड हार्डिंग के लिए बिहार वासियों के मन में आज भी सम्मान है। साभार: प्रभात खबर

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