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मेरी नौकरी ही मेरी उपलब्धि है : सूबेदार तृप्ति सिंह राजपूत

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। मेरे पिता जी पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पदस्थ होते हुए भी अपने दोनों बच्चों मुझे और मेरे बड़े भैया को पुलिस विभाग में अफसर बनाने में अहम भूमिका निभाए। इसके लिए उन्होंने हम दोनों भाई बहन को ग्राउंड पर कोचिंग देते हुए फिजिकली स्ट्रॉन्ग बनाया। माँ गृहणी है । मानसिक रूप से हर परिस्थितियों से लडने के लिए मजबूत बनाने में विशेष योगदान रहा और उन्होंने हमें बताया कि बाहर निकलकर लोगो को कैसे फेस करना है। कम उम्र में ही जिम्मेदार पद नियुक्त हुई। यह सब बातें दुर्ग जिले में पदस्थ सूबेदार तृप्ति सिंह राजपूत ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही, उन्होंने अपने अब तक का सफर हमसे साझा किया।

सूबेदार तृप्ति सिंह राजपूत का जन्म दुर्ग जिला के ग्राम टेकापार में हुआ था, इनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हायर सेकंडरी तक कि शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर राजनांदगांव में हुई। दिग्विजय कॉलेज, राजनांदगांव से इन्होंने वर्ष 2010 में बायोलॉजी विषय मे स्नातक की डिग्री हासिल क़िया। पढ़ाई के उपरांत इन्होंने पीएससी की तैयारी शुरू किया और वर्ष 2011 के सीजी पीएससी में भाग लिया और प्री-मेन्स एग्जाम दिया लेकिन इनका चयन नही हो पाया। इसी दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस में भर्ती निकली और इन्होंने 700 परीक्षार्थियों में महिला वर्ग से टॉपर रहते हुए वर्ष 2013 में सूबेदार पद पर चयनित हुई। इसी दौरान इनका चयन सीआईएसएफ के एएसआई के पद पर भी चयन हुआ पर वहां इन्होने ज्वाईन नही किया।

सूबेदार तृप्ति सिंह राजपूत की पहली पोस्टिंग बतौर प्रशिक्षु 2015 में बिलासपुर जिले में हुई जहां यह 2017 तक पदस्थ रही। जनवरी 2017 में इनका तबादला दुर्ग जिला में हुआ तब से यह वीवीआइपी जिला दुर्ग में अपनी सेवाएं दे रही है।
सूबेदार तृप्ति सिंह राजपूत को अपने किचन और घर को समय देने में विशेष रुचि है और यह अपने माता-पिता को अपना आदर्श मानती है।

महिला दिवस पर महिलाओं को संदेश देते हुए इन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ जो धारणाए जुड़ी है उसके कारण वो आगे नही जा पाती लेकिन अब समय बदल गया है अपने आप को सक्षम बनाकर मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। इसके लिए इन्हें पारिवारिक और फील्ड की जिम्मेदारी पूरी करनी होगी। हर एक परिस्थितियां चाहे वो पॉजिटिव हो या निगेटिव अपने आप को सरवाईव करने की भरपूर क्षमता रखनी चाहिए। कभी भी यह अहसास ना होने दे कि आप एक महिला है और आप किसी काम को नही कर पाएंगी।

जीवन मे हर चुनौतियों के लिए तैयार रहे। मेरे पति धनंजय सिंह राजपूत भी छत्तीसगढ़ पुलिस में सब इंस्पेक्टर है। एक ही विभाग में होने के बाद भी इतना व्यस्तम होते हुए भी तालमेल बिठा कर जॉब कर रहे है, दो छोटे बच्चे और वीवीआइपी जिला में पोस्टिंग के बाद भी पूरी क्षमता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हूं। मेरी नौकरी ही मेरी उपलब्धि है। इनके बड़े भाई अंबर सिंह भारद्वाज भी सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए और कराटे के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है और उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला है जो वर्तमान में साजा थाना प्रभारी हैं। इनके पिताजी भी कराटे खिलाड़ी है और राष्ट्रीय कोच भी है।

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