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मंच पर विदेशी कलाकारों के साथ छत्तीसगढ़ी गाना महुवा झड़े में थिरके मुख्यमंत्री एवं मन्त्रीगण

रायपुर। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के समापन अवसर पर आज देर रात तक आदिवासी नृत्य दलों ने रंगारंग आकर्षक प्रस्तुतियां दी। गीत, संगीत, नृत्य और रंगों के सम्मोहन में दर्शकों के साथ ही अतिथिगण भी देर रात तक बंधे रहे। ऊपर मंच पर कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, मन्त्रीगण एवं अतिथिगण और नीचे दर्शकों के पैर छत्तीसगढ़ी गाना महुआ झड़े में लगातार थिरकते रहे। दूसरे प्रदेश के कलाकारों के साथ ही विदेशी कलाकारों ने भी छत्तीसगढ़ गाना में खूब नृत्य किये और छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया के नारा लगाए। मुख्यमन्त्री एवं अतिथिगण एवं कलाकार छत्तीसगढ़ के गाना बजने के दौरान खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए। वे काफी देर तक मंच में कदम मिलाते रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वाद्ययंत्र भी बजाया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दर्शकों से पूछा कि यह नृत्य हर साल होना चाहिए कि नही, सबका जवाब आया होना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बूढ़ातालाब के आकर्षक तट पर ‘छत्तीसगढ़ लोक कला शिल्प संसार‘ का किया अवलोकन

 

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद सरोवर बूढ़ातालाब स्थित बेहद आकर्षक और रोशनी से जगमगाते छत्तीसगढ़ लोक माटी शिल्प परिसर पहुंचे और वहां ‘छत्तीसगढ़ लोक कला शिल्प संसार‘ विक्रय सह-प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने परिसर में छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना तथा आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉल में गोबर तथा माटी के दीया सहित दीवाली की अन्य पूजन सामग्री खरीद कर उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस दौरान लोगों से अपील भी की कि स्थानीय विक्रेताओं और कुम्हारों से ही दीया खरीदे और सदियों से परंपरागत विधियों और भरपूर उत्साह के साथ मनाते आ रहे दीवाली त्यौहार की सार्थकता को साकार करें।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर दीपदान महोत्सव के तहत एक लाख दीये के निःशुल्क वितरण के पुनीत कार्य की शुरूआत भी की। उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक कला शिल्प संसार में भ्रमण के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से बातचीत की और उनसे गोबर से बने दीये आदि पूजन सामग्रियों की खरीददारी भी की। परिसर में छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना तथा आजीविका मिशन के तहत महिला समूहों द्वारा छह स्टॉल लगाए गए है। उल्लेखनीय है कि समूह की ये महिलाएं न केवल मिट्टी और गोबर से बने आकर्षक दीये, मूर्तियां और पूजन सामग्रियां बना रही हैं, बल्कि वे विभिन्न प्रकार के साबुन, बेकरी, कुकीज, आचार जैसी दर्जनों अन्य सामग्री भी बना रही हैं। इन सामग्रियों को बनाने में गोधन न्याय योजना भी बेहद सार्थक साबित हो रही है।

बेहद आकर्षित और रोशनी से जगमगाते परिसर का पैदल भ्रमण करने के उपरांत मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नागरिकों से अपील की कि हमारे यहां दीपावली के अवसर पर पारंपरिक रूप से मिट्टी के दीये बनाने की गौरवमयी परंपरा रही है। मेहनतकश लोग पारंपरिक के साथ आधुनिक तरीके से भी अब मिट्टी और गोबर के दीये और पूजन सामग्री बना रहे हैं। नागरिक इनसे खरीददारी करें और ऐसी गौरवमयी परंपराओं को निरंतर बढ़ावा दें। जिससे हमारे परंपरागत व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार के अच्छे अवसर मिलते रहे और उनकी आमदनी अच्छी हो। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों के साथ परिसर में आकाशदीप को आसमान में उड़ाया और दीपावली के लिए पूरे प्रदेश की जनता को अपनी शुभकामनाएं दी।

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