BREAKING

घर-परिवार

बेहद खास है इस साल का करवा चौथ, सूर्य देव की भी रहेगी विशेष कृपा, नोट कर लें पूजा- विधि और सामग्री की पूरी लिस्ट

पहली बार रख रहे हैं करवा चौथ का व्रत तो इन बातों का रखें ध्यान, नोट कर लें पूजा- विधि और सामग्री की पूरी लिस्ट

नईदिल्ली (ए)। महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का व्रत करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने जीवनसाथी के दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 24 नवंबर दिन रविवार को निर्धारित है। इसको लेकर बाजार में दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर कलश, चलनी, करवा चौथ कथा की पुस्तक, करवा के अलावा सुहागिनों के श्रृंगार के सामान दुकानों में रखे गए हैं। महिलाओं ने अभी से करवा चौथ को लेकर बाजारों में खरीदारी शुरू कर दी है। वहीं बाजारों में भी खूब चहल-पहल दिखाई दे रही है।

करवा चौथ पर बन रहे शुभ योग

विवाहित महिलाओं के द्वारा पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जानेवाला महापर्व करवा चौथ इस बार कई अच्छे संयोग में आ रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 24 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को पड़ रही है। खास बात यह है कि पांच साल बाद फिर इस करवा चौथ पर शुभ योग बन रहा है। करवा चौथ पर इस बार रोहिणी नक्षत्र में पूजन होगा तो वहीं रविवार का दिन होने की वजह से भी व्रती महिलाओं को सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त होगा। खास तौर पर सुहागिनों के लिए यह करवा चौथ अखंड सौभाग्य देने वाला होगा। करवा चौथ के दिन मां पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय एवं गणेश सहित शिव परिवार का पूजन किया जाता है। मां पार्वती से सुहागिनें अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस दिन करवे में जल भरकर कथा सुनी जाती है। महिलाएं सुबह सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।

शाम 6:55 से शाम 8:51 बजे तक करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • कोरैय निवासी ज्योतिषाचार्य पं. राजेश झा शास्त्री ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में चांद निकलेगा और पूजन होगा। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि इस साल 24 अक्टूबर 2021, रविवार सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी जो अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। इस दिन चांद निकलने का समय 8 बजकर 11 मिनट पर है। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर 2021 को शाम 06:55 से लेकर 08:51 तक रहेगा।

करवा चौथ पूजा- विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
  • स्नान करने के बाद मंदिर की साफ- सफाई कर ज्योत जलाएं।
  • देवी- देवताओं की पूजा- अर्चना करें।
  • निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  • इस पावन दिन शिव परिवार की पूजा- अर्चना की जाती है।
  • सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
  • माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
  • करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है।
  • चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखें।
  • इसके बाद पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तोड़ा जाता है।

करवा चौथ पूजन सामग्री

  • चंदन, शहद, अगरबत्ती, पुष्प,  कच्चा दूध, शक्कर,  शुद्ध घी, दही, मिठाई, गंगाजल, अक्षत (चावल), सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी,  बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन,  दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शक्कर का बूरा, हल्दी, जल का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, चलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा (दान) के लिए पैसे आदि।

व्रती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान-

1. हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य के दौरान काला पहनने की मनाही होती है। यह अशुभता का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं कि मंगलसूत्र के काले दाने के अलावा इस दिन किसी काले रंग का प्रयोग न करें।

2. मान्यता है कि सुहागिनों को सफेद वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए। सफेद रंग सौम्यता और शांति का प्रतीक माना जाता है। लेकिन सुहाग के लिए रखे जाने वाले करवा चौथ व्रत में सफेद रंग की मनाही होती है।

3. करवा चौथ के दिन सुहागिन स्त्रियों को भूरा रंग पहनने से बचना चाहिए। मान्यता है कि यह रंग राहु और केतु का प्रतिनिधित्व करता है।

इन रंगों के वस्त्र धारण करना माना जाता है शुभ-

  • करवा चौथ के दिन सुहागिनों को लाल, गुलाबी, पीला, हरा और महरून रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पहली बार करवा चौथ व्रत रखने वाली स्त्रियों को लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इतना ही नहीं पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं अगर शादी का जोड़ा पहनती हैं तो, इसे और उत्तम माना जाता है।

निर्जला व्रत रखें

  • करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है। इस व्रत में चांद के दर्शनों का विशेष महत्व होता है। रात में चांद के दर्शनों के बाद ही व्रत पूरा माना जाता है। रात्रि में चंद्रमा के दिखने पर ही अर्घ्य प्रदान करें। इसके साथ ही, गणेश जी और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य देना चाहिए।

सरगी

  • इस व्रत में सास सूर्योदय से पूर्व अपनी बहू को सरगी के माध्यम से दूध, सेवई आदि खिला देती हैं। फिर शृंगार की वस्तुएं- साड़ी, जेवर आदि करवा चौथ पर देती हैं।

चांद निकलने का समय- रात्रि 8 बजकर 11 मिनट पर। अलग- अलग शहरों में चांद निकलने के समय में बदलाव हो सकता है। 

Related Posts