नईदिल्ली (ए)। भाजपा नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रव्यापी विस्तार के बाद उसकी पहुंच को व्यापक बनाने और मजबूती देने में जुटा हुआ है। इसके लिए रणनीति के तहत सरकार और संगठन में बड़े शहरों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े नेताओं को आगे लाया जा रहा है। हाल में हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विस्तार, राज्यों के परिवर्तन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन में इस दिशा में काफी काम भी किया गया है। दरअसल भाजपा नेतृत्व 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर काम कर रहा है, जिसमें उसे राष्ट्रीय दलों की वजह क्षेत्रीय दलों से ज्यादा चुनौती मिलने की संभावना है।
2022 से बीजेपी शुरू करेगी सदस्यता अभियान, गृह मंत्री अमित शाह करेंगे शुरुआत
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा अपना समर्थन बढ़ाने को एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। आगामी 22 अक्तूबर से पार्टी प्रदेश में अपना सदस्यता अभियान शुरू करने की प्लानिंग कर रही है। इसकी शुरुआत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथों होनी है।
पार्टी ने इस बार प्रदेश में डेढ़ करोड़ नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। भाजपा की योजना में अपनी सदस्य संख्या चार करोड़ तक पहुंचाने की है ताकि अपने बूते सत्ता की चाबी हासिल की जा सके। भाजपा के प्रदेश में फिलहाल ढाई करोड़ सदस्य हैं। इनमें से करीब डेढ़ करोड़ का सत्यापन भी हो चुका है।
इस बार डेढ़ करोड़ नए सदस्य बनाकर चार करोड़ का आंकड़ा छूने का टारगेट रखा गया है। सदस्यता अभियान को लेकर पार्टी ने भारी-भरकम रोडमैप तैयार किया है। इसकी शुरुआत अमित शाह खुद कुछ लोगों को सदस्यता दिलाकर करेंगे। उनसे 22 अक्तूबर का समय मांगा गया है।
प्रदेश स्तर पर इसकी रूपरेखा तय हो गई है। अभियान शुरू होते ही क्षेत्र और जिला स्तर पर बैठकें होंगी। प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं की भूमिका और सदस्यता के लक्ष्य तय कर दिए गए हैं। मुख्य संगठन से लेकर सभी मोर्चों को भी इस काम में लगाया जाएगा।
इसके अलावा सभी जनप्रतिनिधियों को भी लक्ष्य दे दिए गए हैं। उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर सदस्यता कैंप आयोजित करने होंगे। पार्टी नए लोगों को घर-घर जाकर जोड़ने के साथ ही हेल्पलाइन नंबर के जरिए भी सदस्य बनाएगी।
ऐसे में उसकी नई रणनीति काफी कारगर हो सकती है। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि भाजपा इस समय देश की सबसे बड़ी पार्टी है। हर राज्य में उसकी पहुंच है और इसे मजबूती देने के लिए कस्बों से गांव तक पहुंची है। अब वहां के नेतृत्व को भी आगे लाया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों के बड़े नाम और कद वाले नेताओं के बजाय पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों के नेताओं को सत्ता और संगठन दोनों में महत्व दे रही है।
सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश
बिहार में जेडीयू के साथ गठबंधन सरकार में पार्टी ने इसी के तहत अपने जो दो उपमुख्यमंत्री बनाए और प्रदेश संगठन के नेतृत्व को इसी गणित के तहत उभारा है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश समेत कई प्रमुख राज्यों में पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों और उस परिवेश से आने वाले नेताओं पर विशेष ध्यान दे रही है। इसमें सामाजिक समीकरण को भी पूरी तरह साधा जा रहा है।
भाजपा के सामने राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी चुनौती नहीं
पार्टी के एक महासचिव ने कहा है कि हमारा आधार तो व्यापक हो गया है, लेकिन उसकी जड़े मजबूत करने के लिए उन क्षेत्रों के नेतृत्व को भी हमें मजबूत करना है। दरअसल भाजपा के सामने राष्ट्रीय स्तर पर तो कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन विभिन्न राज्यों में उसे मजबूत क्षेत्रीय दलों से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में राज्यों में नेतृत्व व क्षेत्र को लेकर वह काफी सजग है।















