भिलाई। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं डॉ अंबेडकर मृत्युभूमि संस्थान नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्रेश गजभिए ने कहा है कि देश की आजादी के 70 साल बाद भी दलितों की स्थिति और तकदीर नहीं बदली है। उन्होंने कहा कि नीति के साथ-साथ नियत भी साफ होनी चाहिए लेकिन सरकारों की नियत में खोट रही. केंद्र में बैठी सरकारों ने दलित समाज के उत्थान के लिए नीतियां तो खूब बनाई लेकिन इन नीतियों को धरातल पर उतारने का कोई प्रयास नहीं हुआ।
श्री गजभिए का कहना था कि सरकारों को यह डर है कि दलितों की संख्या देश में बहुत ज्यादा है. यदि यह समाज जग जाएगा तो यह सत्ता हथिया लेगा, इसलिए वे चाहते हैं कि सत्ता उनके हाथ में बनी रहे और हम केवल वोटर्स बने रहें. हाल ही में कांग्रेस द्वारा पंजाब में दलित सीएम बनाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे समाज में कांग्रेस के प्रति अच्छा संदेश गया है. उन्होंने भाजपा से भी मांग की कि 22 राज्यों में कुछ राज्यों में वे भी दलित सीएम बनाए अन्यथा यह समाज भी उनका साथ देने के लिए सोचेगा।
श्री गजभिए समाज की कुछ मांगों को लेकर पूरे देश का भ्रमण कर रहे हैं. इस यात्रा के दौरान वे रविवार, 10 अक्टूबर को भिलाई पहुंचे. ऑल इंडिया एससी एसटी फेडरेशन के सेक्टर-4 स्थित भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पहली मांग थी डॉक्टर अंबेडकर मृत्युभूमि, 26 अलीपुर रोड, दिल्ली को राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाए. यह मांग लगातार 18 वर्षों के आंदोलन के बाद पूरी हो चुकी है. किंतु अभी कई मांगें बची हैं।
उनकी पहली मांग है कि पृथक निर्वाचन प्रणाली लागू की जाए जिसे 1932 में बाबा साहब ने अंग्रेजी हुकूमत से मंजूर कर आई थी जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया. उन्होंने बताया कि देश में एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों पर जो सांसद और विधायक चुनकर आते हैं वे समाज के प्रति उतने उत्तरदाई एवं जिम्मेदार नहीं होते।
श्री गजभिए का कहना था कि जो आरक्षित सीटें होती हैं वहां पर भी 60 फिसदी स्वर्ण वोटर्स शामिल रहते हैं. सवर्ण वोटर्स जिसके पक्ष में वोट कर देता है वह जीत जाता है. इस तरह वह दलितों का प्रतिनिधित्व नहीं करता. वह सवर्णों की पसंद का होता है. इसलिए समाज के लिए मजबूती से नहीं लड़ पाता. बाबा साहब ने यह देखते हुए ही व्यवस्था कराई थी कि यदि आरक्षित सीटों पर केवल दलितों को ही वोट देने का अधिकार रहे तो ऐसे प्रतिनिधि समाज के साथ गद्दारी नहीं कर पाएंगे. क्योंकि ऐसे में समाज उन्हें दंडित करेगा और आगामी चुनाव में हरा देगा।
एक अन्य मांग का जिक्र करते हुए श्री गजभिए ने कहा कि दिल्ली में जहां कांग्रेस और भाजपा के दिवंगत नेताओं की समाधि स्थल कई एकड़ जमीनों पर बनाई गई है वहीं बाबा साहेब की समाधि केवल 1 एकड़ भूमि में है. उनकी मांग है कि बाबा साहेब की समाधि स्थल को भी बड़ा परिसर मिले. आजू बाजू में जितने भी सरकारी और प्राइवेट बंगले हैं उनको खाली कराकर सरकार एक बड़ा भूमि परिसर समाधि स्थल को दें।
श्री गजभिए ने कहा कि 1951 में एक कानून बना जिसके तहत महात्मा गांधी समाधि स्थल पर किसी भी विदेश से जो भी राष्ट्रीय अध्यक्ष भारत आता है उसको समाधि स्थल पर ले जाया जाता है तथा उससे पुष्पांजलि कराई जाती है. यह एक प्रोटोकोल है. ऐसा ही प्रोटोकॉल बाबा साहेब की समाधि के लिए भी बनाया जाए. इस अवसर पर संस्थान के राष्ट्रीय महासचिव सुनील रामटेके, प्रदेश अध्यक्ष अनिल खोब्रागड़े,अनिल गजभिए,आनंद रामटेके एवं मधुकर ठावरे भारतीय बौद्ध महासभा से अध्यक्ष नरेंद्र खोबरागडे पूर्व अध्यक्ष विनोद वासनिक बुद्धिस्ट सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल मेश्राम आर एस चौहान चित्रसेन कोसरे अशोक धवले श्रीमती सुजाता रामटेके अनीता मेश्राम संगीता पटेल अरुण वैद्य उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में रायपुर के बौद्ध समाज के प्रदेश महासचिव भोजराज गौरखेड़े दुर्ग से बबलू चौरे बिलासपुर से प्रदेश उपाध्यक्ष सारंग हमने भोपाल के मिलिंद रामटेके डूंगरगढ़ के पूर्व विधायक विनोद खंडेकर के अतिरिक्त आठ से 10 जिलों के बौद्ध समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पत्रकार वार्ता के पश्चात बौद्ध महासंघ की प्रदेश स्तरीय बैठक में महासंघ के अध्यक्ष सीनियर आईएएस श्री दिलीप वासनीकर जी ने कांकेर के वरिष्ठ बौद्ध समाज के युवा प्रतिनिधि चक्रेश्वर गड़पायले जी को बौद्ध महासंघ का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया।















