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दुर्ग-भिलाईफीचर्डसाक्षात्कार

मैंने पद की कभी लालसा नही की, जो मिला उसे स्वीकार कर लिया, जिम्मेदारी को नजरिये से नही देखा सिर्फ काम करता रहा: अश्वनी साहू

दुर्ग (सारनाथ एक्सप्रेस)। सरकार के साथ-साथ आम लोगो की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि पशुओं की देख रेख करे, आज पशुओं को खुले में छोड़ दिया जा रहा है, गाय को हम माता का दर्जा देते है लेकिन उनकी अच्छी सेवा नही करते, चुनाव के समय ही गाय की उपयोगिता दिखती है, गाय कोई रखना नही चाहता लेकिन दूध सबको चाहिए। आज जो लोगो मे नकारात्मक सोच बढ़ी है वह चिंता का विषय है। यह सब बातें कृषि उपज मंडी समिति, दुर्ग के अध्यक्ष अश्वनी कुमार साहू ने सारनाथ एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने अपने अब तक के सफर को समझे साझा किया।
अश्विन साहू का जन्म पाटन के पतोरा ग्राम में हुआ था, इनकी प्रारंभिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा ग्राम पतोरा के शासकीय स्कूल में हुई। हायरसेकंडरी की शिक्षा इन्होंने शासकीय हायरसेकंडरी स्कूल, सैलूद से पूर्ण किया। वर्ष 1984 में इन्होंने साइंस कॉलेज, दुर्ग में प्रवेश लिया तथा वर्ष 1987 में आट्र्स में स्नातक की डिग्री हासिल किया। कल्याण महाविद्यालय, भिलाई से वर्ष 1989 में इन्होंने प्राइवेट राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। पढ़ाई के साथ साथ वर्ष 1980 से यह सामाजिक कार्य से जुड़ गए साथ ही जय बजरंग बाल समाज संस्था बनाया। समाजिक कार्य से जुडऩे के साथ ही यह अपने आस पास के क्षेत्र की नाली सफाई, रोड के गड्ढे भरना, श्रमदान आदि कार्यो को करने लगे।
1982 में हनुमानजी के चबूतरे को मंदिर का रूप दिया और 1987 में जय बजरंग मानस मंडली (रामायण मंडली) पतोरा की स्थापना की। इसके बाद से यह आस पास के गांवों में छठ्ठी और धार्मिक आयोजनों में अपनी सेवा देने लगे। सामाजिक और धार्मिक कार्यो के कारण यह आस पास के क्षेत्र में प्रसिद्ध होने लगे और वर्ष 1990 में साहू समाज पतोरा के सचिव बने। परिक्षेत्र साहू समाज के कोषाध्यक्ष, महासचिव और दो कार्यकाल तक अध्यक्ष रहे। वर्ष 2000 से 2006 तक तहसील साहू संघ, पाटन के न्याय प्रकोष्ठ के सचिव रहे फिर तहसील साहू संघ, पाटन के महासचिव रहे और  वर्ष 2016 में तहसील साहू संघ पाटन के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए और वर्तमान में इनका दूसरा कार्यकाल चल रहा है।
यह अपने अंचल के मानस मंडली के मंच उदघोषक (एंकर) है और राजनीतिक, धर्मिक, सामाजिक आदि मंचो का संचालन करते है। कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष बनने के बाद भी यह छठ्ठी और रामायण कार्यक्रम में आते जाते है और जुड़े हुए है। यह वर्ष 2000 से 2015 तक लगातार दिन बार गॉव के सरपंच रहे।
अध्यक्ष अश्वनी साहू ने बताया कि वर्ष 1993 में जब पहली बार पाटन विधानसभा से भूपेश बघेल चुनाव लड़े थे तब यह एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। पिछले दो चुनाव को छोड़ कर बाकी के सभी चुनाव में यह भूपेश बघेल के प्रस्तावक रहे है। भूपेश बघेल के नेतृत्व में भिलाई इस्पात संयंत्र के टीओ/टीओटी भर्ती वर्ष 2003 और पुरैना पॉवर प्लांट की अव्यवस्था के खिलाफ वर्ष 2008 में किये गए आंदोलन में दो बार जेल भी गए थे।
विधानसभा चुनाव के समय पूरे पाटन का दौरा कर मंच संचालन किए। डोंगरगढ़ से रायपुर तक कि न्याय यात्रा और बिलासपुर से रायपुर तक महतारी न्याय यात्रा में भी भूपेश बघेल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ चले। भूपेश बघेल के हर संघर्षो में साथ रहे, उनके प्रति निष्ठा, ईमानदारी से काम किया। शुरू से उनके साथ जुड़ा रहा। मैंने पद की कभी लालसा नही की, उन्होंने जो दिया उसे स्वीकार कर लिया। जिम्मेदारी को नजरिये से नही देखा सिर्फ काम करता रहा।
खेती-बाड़ी, पालतू जानवरों से हमेशा लगाव रहा और आज भी है इसलिये सब काम खुद ही करता हूं। सामाजिक और धार्मिक कार्य कर के जो शुकुन मिलता है वो कही और नही है। आज भी रामायण और पत्र-पत्रिकाओं का, साहित्य का वाचन करता हूँ। मेरी धर्मपत्नी गृहणी है। दो बेटे और एक बेटी है। पिताजी बीएसपी रिटायर्ड है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हर क्षत्रे में बेहतर कार्य हो रहा है। मंडी बोर्ड में नए नए काम हो रहे है, सेवा सहकारी समिति के मंडियों में चबूतरा बन रहा है। नई दुकानों की सँख्या बढ़ाने मंडी बोर्ड को लेटर लिखा गया है। सी मार्ट, मंडी में नई नियुक्तियों, अनाज मंडी बनाने, हाट बाजार, मुख्यमंत्री सुगम योजना आदि के लिए मंडी बोर्ड को लेटर लिखा गया और लगातार बातचीत चल रही है, समीक्षा बैठक ली जा रही है। यह सब हो जाने किसानों को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी और रोजगार और आय के साधन बढेंगे।

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