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पितृ पक्ष आज से प्रारंभ, ऐसे करें तर्पण, श्राद्ध से चुकाया जाता है पितरों का ऋण, तिथि अनुसार करें श्राद्ध

नईदिल्ली (ए)। अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए मनाया जाने वाला पर्व पितृ पक्ष 21 सितम्बर से शुरू होगा। इस पितृ पक्ष 16 दिन का होगा और यह 6 अक्तूबर तक चलेगा। भाद्रपद मास की पूर्णिमा के दिन जिनके पूर्वजों की मृत्यु हुई है, वे 20 सितम्बर को ही पितरों का श्राद्ध कर्म करेंगे।

पितरों के श्राद्ध के लिए के लिए यह पखवारा 20 सितम्बर से शुरू हो रहा है। इस पक्ष में पूर्णिमा 20 सितम्बर को पड़ रही है इसलिए इसे पूर्णिमा श्राद्ध भी कहते हैं। प्रथमा तिथि 21 सितम्बर को पड़ रही है। 6 अक्तूबर को सर्वप्रीत अमावस्या पड़ रही है। इसी दिन आखरी पितृ विसर्जन की अमावस्या तिथि है। इस वर्ष तृतीया तिथि की वृद्धि हो जाने से यह पक्ष 16 दिन का हो गया है। वायु पुराण में इसके बारे में विस्तृत से वर्णन है। पितृ पक्ष में अपने पिता के मृत्यु के तिथि को ही श्राद्ध कर्म करना चाहिए। जिनको यह तिथि ज्ञात न हो उन्हें अंतिम दिन पितृ विसर्जन करना चाहिए।

ऐसे करें श्राद्ध तर्पण

सुबह स्नानादि के बाद पितरों का तर्पण करने के लिए सबसे पहले हाथ में कुश लेकर दोनों हाथों को जोड़कर पितरों का ध्यान करें। उसके बाद उन्हें अपनी पूजा स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करें। पितरों को तर्पण में जल, तिल और फूल अर्पित करें। इसके अलावा जिस दिन पितरों की मृत्यु हुई है, उस दिन उनके नाम से और अपनी श्रद्धा व यथाशक्ति के अनुसार भोजन बनवाकर ब्राह्मणों, कौवा और कुत्ते को भोजन कराकर दान करें।

श्राद्ध से चुकाया जाता है पितरों का ऋण

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से करीब 15 दिनों तक पितृपक्ष मनाया जाता है। पितरों का ॠण श्राद्ध के माध्यम से चुकाया जाता है। श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा से जो कुछ दिया जाए। पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से पितरगण वर्ष भर तक प्रसन्न रहते हैं और आर्शीवाद देते हैं। इस दौरान प्रतिदिन स्नान के बाद तर्पण करके ही कुछ खाना पीना चाहिए।

इस वर्ष पितृ पक्ष की श्राद्ध की तिथियां
-20 सितंबर:  पूर्णिमा का श्राद्ध।
-21 सितंबर:  प्रतिपदा का श्राद्ध।
-22 सितंबर:  द्वितीया तिथि का श्राद्ध।
-23 सितंबर:  तृतीया तिथि का श्राद्ध।
-24 सितंबर:  चतुर्थी तिथि का श्राद्ध।
-26 सितंबर:  पंचमी तिथि का श्राद्ध।
-27 सितंबर:  षष्ठी तिथि का श्राद्ध।
-28 सितंबर:  सप्तमी तिथि का श्राद्ध।
-29 सितंबर:  अष्टमी तिथि का श्राद्ध।
-30- सितंबर:  नवमी तिथि का श्राद्ध, सौभाग्यवती महिलाओं का श्राद्ध।
-01 अक्टूबर: दशमी का श्राद्ध।
-02 अक्टूबर: एकादशी तिथि का श्राद्ध।
-03 अक्टूबर: द्वादशी तिथि का श्राद्ध।
-04 अक्टूबर: त्रयोदशी का श्राद्ध।
-05 अक्टूबर: चतुर्दशी की का श्राद्ध।
06 अक्टूबर: अमावस्या का श्राद्ध, भूले-बिछुड़े का श्राद्ध।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।) 

 

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