सच्ची बात सुनना यहां पर,है पसंद किसे,
यहां हर तरफ फैला झूठों का बाजार हैं|
मेहनत करना यहां पर,है पसंद किसे,
यहां तो, मुफ़्त की रोटी तोड़ने हजार हैं|
तुम्हारे हक की बात करनी,है पसंद किसे ,
यहां तुम्हारा हक़ छीनने ,लोग बैठे बेकरार हैं|
तुम आगे बढ़ो,यह बात है पसंद किसे,
यहां पर गड्ढा खोदने को, लोग तैयार हैं|
तुम ऊंचे सपने देखो ,यह बात है पसंद किसे ,
यहां तुम्हारे पंख कुतरने को, लोग हजार हैं|
लड़ो हक़ की लड़ाई,यह बात है पसंद किसे ,
यहां लोग तुम्हारी आवाज़ दबाने को,तैयार हैं,
सच्ची बात सुनना यहां पर ,है पसंद किसे,
यहां हर तरफ फैला झूठों का बाजार हैं|
सीमा सरू दर्शीनी
बिलासपुर,छत्तीसगढ़












