दुर्ग (धमधा)। “में कभी बाप-पुरखा इस्कूल नहीं देखें रहंव, मोर दाई-ददा मन मोला पढ़ाये बार नहीं भेजिस हे अउ ए बीमारी के डर हा मोला 14 दिन भर इस्कूल में बन्द कर देहे” -ग्राम पंचायत राजपुर विकास खण्ड धमधा जिला दुर्ग छ ग के शा प्रा शाला राजपुर के क्वारेन्टाईन सेन्टर में 14 दिन क्वारेम्टाईन मे रही श्रीमति हीराबाई साहू पति पंचराम साहू के द्वारा कहे गए इन शब्दों ने एक सोच को, एक पहल को शुरू करने की प्रेरणा दी है। जब वह क्वारंटाइन सेंटर में आई थी। वो निरक्षर थी। वे कभी स्कूल का मुख भी नही देखी थी परन्तु आज 23/05/2020 को क्वांरेन्टाईन सेन्टर से साक्षर होकर बाहर आयी हैं। हीराबाई की उम्र 40 वर्ष की है। एर्स डी एम धमधा के निर्देश पर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी की टीम के मार्गदर्शन में क्वारंटाइन सेंटर में रहने वाले व्यक्तियों के द्वारा ही सामाजिक दूरी का पालन करते हुए हीराबाई को अक्षरों का ज्ञान, हस्ताक्षर करना सीखया गया। गांव के सचिव और सरपंच ने भी हीराबाई को प्रोत्साहित किया। वर्तमान में धमधा विकासखंड के ग्राम स्तरीय सभी क्वारंटाइन सेंटरों में निरक्षर व्यक्तियों का सर्वे कर, सेंटर के व्यक्तियों द्वारा ही सामाजिक दूरी का पालन करते हुए निरक्षर व्यक्तियों को 14 दिन में अक्षरों के ज्ञान तथा हस्ताक्षर सिखाने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी की टीम अभियान चला रही है।









