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राजनीतिक स्वार्थसिद्धि के लिए विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो: शुभम जायसवाल

रायपुर। विश्वविद्यालय परीक्षा संचालन के विषय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा है. ज्ञापन के माध्यम से विद्यार्थी परिषद् के प्रदेश मंत्री शुभम जायसवाल ने कहा कोविड-19 संक्रमण की वैश्विक महामारी छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं रहा है। सौभाग्यवश हमारे प्रांत में संक्रमण का प्रभाव ज्यादा भयावह नहीं है, जिससे जनजीवन सामान्य होने की दिशा में अग्रसर है। जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए लॉकडाउन में ढील देना एक स्वाभाविक कदम हो सकता है और शासन-प्रशासन की भी यही इच्छा दिखाई पड़ रही है।
कोविड 19 के कारण शैक्षणिक जगत निरन्तर कई प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहा है। महाविद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक के विद्यार्थियों के बीच परीक्षाओं को लेकर असमंजस की स्थिति निर्मित हुई है। इन पररिस्थितियों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा निर्देश के बाद भी कुलाधिपति व सरकार द्वारा किसी भी दिशा-निर्देश के अभाव में प्रदेश के विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों की परीक्षाओं को लेकर उन्हें उचित मार्गदर्शन देने में स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं।
इस विषय पर विद्यार्थी परिषद यह का मत है कि यद्यपि उच्च शिक्षा में परीक्षा का यथासमय पर ना होना कुछ समस्याओं को जन्म अवश्य देगा तथापि परीक्षा न लेकर जनरल प्रमोशन की ओर जाने से स्थिति की गम्भीरता कहीं अधिक होगी। वैसे भी प्रदेश का शिक्षा-स्तर न तो अच्छी स्थिति में है और न ही पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालय से तुलना करने के योग्य भी है। ऐसे में इस प्रकार का निर्णय घातक सिद्ध हो सकता है।
विश्वविद्यालय स्तर पर जनरल प्रमोशन देने से सबसे अधिक समस्या शिक्षा गुणवत्ता को लेकर होगी। और हमारे प्रदेश में जहाँ शिक्षा व्यवस्था आज भी गुणवत्ता के लिए संघर्ष कर रही है वहाँ ऐसे कदम गलत ही होंगे। दूसरे, क्या प्रदेश के महाविद्यालयों में पर्याप्त आधारभूत ढाँचा है कि वह प्रथम वर्ष में जनरल प्रमोशन पाकर द्वितीय वर्ष में जाने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ प्रथम वर्ष में नवीन प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों को अपने भवनों में बैठा सकेंगे? इसका उत्तर भी नहीं ही होगा, क्योंकि प्रदेश का एक भी महाविद्यालय इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं है। कारण यह है कि प्रथम वर्ष की तुलना में द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों की संख्या काफी कम होती है।
जनरल प्रमोशन देने से एक समस्या विद्यार्थियों के अन्तिम परिणाम में एग्रीगेट को लेकर होगी। तीन वर्षों को मिलाकर किसी विद्यार्थी द्वारा प्राप्त कुल अंकों के आधार ही स्नातक स्तर का परिणाम (एग्रीगेट) बनता है। ऐसे में जनरल प्रमोशन से एग्रीगेट बनाने की समस्या तो होगी। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के साथ भी यह अन्याय होगा। अन्तिम वर्ष के विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन देने से तो उन विद्यार्थियों का भविष्य ही सशंकित हो जाएगा क्योंकि ऐसे में उन्हें उच्च स्तर पर प्रवेश अथवा उच्च शिक्षा राज्य से बाहर स्थित संस्थानों में प्रवेश सम्बन्धी समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा।
इन्हीं समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने पत्र के माध्यम से देश के सभी विश्वविद्यालयों को अपनी वार्षिक परीक्षाओं के आयोजन के बारे में दिशा-निर्देश दिये हैं। जिसके अनुसार सभी विश्वविद्यालयों को जून माह में ग्रीष्मकालीन अवकाश और जुलाई माह में वार्षिक परीक्षाओं के साथ अगस्त माह में परीक्षा परिणाम घोषित करते हुए सितम्बर से नये शैक्षणिक सत्र का प्रारम्भ करना है। साथ ही, इसके माध्यम से सभी विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों को अपने सम्बन्धित क्षेत्रों में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर तदनुसार परीक्षाओं के संचालन हेतु उचित कदम उठाने को भी कहा गया है। सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को दूर करने के प्रयास करने के स्थान पर इस तरह के लोक-लुभावन निर्णय लेना विद्यार्थियों के लिए हानिकारक ही सिद्ध होंगे।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि तात्कालिक रूप से जनरल प्रमोशन लुभावना हो सकता है, सरकार व कुछ लोगों को सस्ती लोकप्रियता भी दिला सकता है किन्तु इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम हमें अवश्य ही भुगतने पड़ेंगे। अतः अभाविप का यह मानना है कि सरकार और विश्वविद्यालयों द्वारा कोविड 19 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा व यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार जून महीने में ग्रीष्मावकाश के उपरान्त जुलाई माह में स्थिति का आकलन करते हुए नियमित तथा वैकल्पिक परीक्षा के आयोजन की योजना का प्रारूप तैयार करना सर्वथा उचित होगा।

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